Xiaomi के Find Device फीचर पर रोक से दिल्ली हाई कोर्ट का इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने Xiaomi के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपलब्ध ‘Find Device’ फीचर के इस्तेमाल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर Xiaomi की तकनीक को उस पेटेंट में बताए गए जरूरी तकनीकी तत्वों से पूरी तरह समान नहीं माना जा सकता, जिस आधार पर कंपनी के खिलाफ पेटेंट उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

Xiaomi के ‘Find Device’ फीचर पर रोक लगाने से दिल्ली हाई कोर्ट का इनकार

यह मामला Conqueror Innovations Private Limited और पेटेंट के आविष्कारक द्वारा Xiaomi Technology India Private Limited के खिलाफ दायर की गई कानूनी कार्यवाही से जुड़ा था।

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें Xiaomi के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।

किस तकनीक को लेकर शुरू हुआ विवाद?

विवाद एक पेटेंट से संबंधित है, जिसे “Communication Device Finder System” के नाम से जाना जाता है।

पेटेंट धारकों का दावा था कि यह तकनीक चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन को खोजने और उस पर दूर से कुछ नियंत्रण स्थापित करने में मदद करती है।

मामले के अनुसार, इस तकनीक के विकास के पीछे एक मोबाइल चोरी की घटना भी बताई गई है। आविष्कारक के अनुसार, वर्ष 2004 में चोरी की एक घटना के दौरान उनके 152 मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इसके बाद ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में काम किया गया, जिसके माध्यम से चोरी हुए डिवाइस को उसके मालिक द्वारा दूर से खोजने या नियंत्रित करने में सहायता मिल सके।

पेटेंट धारकों ने आरोप लगाया कि Xiaomi अपने उपकरणों में उपलब्ध Find Device सुविधा के माध्यम से उनके पेटेंट में संरक्षित तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।

Also Read: सत्या निकेतन PG हादसा: शुबम त्यागी को अग्रिम जमानत से इनकार

पेटेंट धारकों ने Xiaomi के खिलाफ क्या मांग की?

पेटेंट धारकों ने दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि Xiaomi को कथित रूप से पेटेंट तकनीक का इस्तेमाल करने से रोका जाए।

उनका कहना था कि Xiaomi के स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य उपकरणों में मौजूद Find Device सिस्टम उनके पेटेंट में वर्णित तकनीक से संबंधित है।

हालांकि, एकल न्यायाधीश ने जुलाई 2025 में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पेटेंट धारक इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की खंडपीठ के सामने पहुंचे।

अदालत ने Xiaomi की तकनीक और पेटेंट में अंतर माना

खंडपीठ ने मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह देखा कि क्या Xiaomi के Find Device फीचर में पेटेंट के आवश्यक तकनीकी तत्व मौजूद हैं।

अदालत ने दोनों प्रणालियों के काम करने के तरीके में अंतर पाया।

पेटेंट धारकों की तकनीक में कुछ ऐसी विशेषताएं बताई गई थीं, जिनके माध्यम से चोरी हुए मोबाइल को नियंत्रित करने और उसकी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने का दावा किया गया था।

Also Read: चेक बाउंस मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आंशिक भुगतान के बाद पूरी रकम का चेक पेश करना गलत

वहीं Xiaomi का Find Device फीचर मुख्य रूप से खोए हुए या चोरी हुए डिवाइस को खोजने तथा उसे दूर से नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

पेटेंट में ‘Auto-Answer’ फीचर क्यों महत्वपूर्ण था?

मामले में पेटेंट धारकों ने ‘Auto-Answer’ सुविधा को एक अहम तकनीकी विशेषता बताया था।

दावा यह था कि अधिकृत व्यक्ति दूर से चोरी हुए फोन को इस तरह कॉल का जवाब देने के लिए सक्रिय कर सकता है कि फोन अपने पास रखने वाले व्यक्ति को इसकी जानकारी न हो।

इस व्यवस्था के जरिए चोरी हुए डिवाइस के आसपास की स्थिति को सुनने की क्षमता का भी दावा किया गया था।

अदालत ने इस विशेषता को पेटेंट की तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।

Xiaomi के Find Device में यह सुविधा नहीं मिली

हाई कोर्ट ने पाया कि Xiaomi का Find Device सिस्टम इस तरह की silent auto-answer सुविधा प्रदान नहीं करता।

Xiaomi का फीचर उपयोगकर्ता को अलग-अलग रिमोट विकल्प उपलब्ध कराता है। उदाहरण के लिए, खोए हुए फोन को ढूंढने के लिए उसमें आवाज बजाई जा सकती है, डिवाइस को लॉक किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसमें मौजूद व्यक्तिगत जानकारी को मिटाया जा सकता है।

अदालत के अनुसार, इन सुविधाओं की मौजूदगी मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि Xiaomi ने पेटेंट की पूरी तकनीक को अपनाया है।

Factory Reset को लेकर भी अदालत ने अंतर देखा

अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि Xiaomi के Find Device फीचर की कार्यप्रणाली डिवाइस को factory reset किए जाने की स्थिति में प्रभावित होती है।

पेटेंट धारकों की तकनीक में बताए गए कुछ दावों और Xiaomi की व्यवस्था के बीच यह अंतर भी अदालत के विचार में महत्वपूर्ण था।

खंडपीठ ने माना कि पेटेंट के आवश्यक तत्वों की अनुपस्थिति में केवल दोनों प्रणालियों का उद्देश्य कुछ हद तक समान होना पेटेंट उल्लंघन साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने ‘Auto-Answer’ की व्यापक व्याख्या स्वीकार नहीं की

पेटेंट धारकों की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि Auto-Answer सुविधा को व्यापक अर्थ में देखा जाना चाहिए और इसे डिवाइस को दूर से सक्रिय करने की क्षमता के रूप में समझा जा सकता है।

अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

खंडपीठ ने इस बात पर ध्यान दिया कि स्वयं पेटेंट धारकों ने अपने मामले में इस सुविधा का वर्णन एक ऐसी व्यवस्था के रूप में किया था, जिसमें फोन बिना उपयोगकर्ता की जानकारी के कॉल का जवाब दे सकता है।

इसलिए अदालत ने माना कि एकल न्यायाधीश द्वारा पेटेंट के इस तत्व को जिस तरह समझा गया था, उसमें कोई स्पष्ट गलती नहीं थी।

पेटेंट के एक अन्य जरूरी तत्व की भी कमी

अदालत ने एक अन्य तकनीकी विशेषता पर भी विचार किया, जो पेटेंट के दावे का हिस्सा थी।

खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के इस निष्कर्ष से भी सहमति जताई कि Xiaomi की प्रणाली में पेटेंट में बताए गए गैर-हटाए जा सकने वाले स्टोरेज और उससे संबंधित डेटा की पुनर्स्थापना से जुड़े आवश्यक तत्व मौजूद नहीं थे।

इस कारण भी पेटेंट उल्लंघन के प्रथम दृष्टया मामले को स्थापित करना कठिन हो गया।

मुकदमा दायर करने में देरी भी बनी अहम वजह

अदालत ने केवल तकनीकी अंतर को ही नहीं देखा, बल्कि मुकदमा लाने में हुई देरी को भी महत्वपूर्ण माना।

Xiaomi की ओर से अदालत को बताया गया कि कंपनी वर्ष 2014 से भारत में अपने उपकरण बेच रही है, जबकि वर्तमान पेटेंट विवाद से संबंधित कार्यवाही वर्ष 2023 में शुरू की गई।

अदालत के समक्ष यह भी रिकॉर्ड आया कि पेटेंट धारक को वर्ष 2015 के आसपास ही यह जानकारी होने की बात सामने आई थी कि मोबाइल कंपनियां इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।

इसके बावजूद कई वर्षों तक तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

हाई कोर्ट ने माना कि इतनी लंबी देरी अंतरिम राहत की मांग में दिखाई जाने वाली तात्कालिकता को कमजोर करती है।

पेटेंट की अवधि भी समाप्ति के करीब थी

अदालत ने पेटेंट की बची हुई अवधि पर भी ध्यान दिया।

खंडपीठ के अनुसार, संबंधित पेटेंट की अवधि 17 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाली थी।

ऐसे में अदालत के सामने यह तथ्य भी था कि यदि इस चरण पर अंतरिम रोक लगा दी जाती, तो उसका प्रभाव सीमित अवधि के लिए ही रहता।

इस परिस्थिति ने भी Xiaomi के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की मांग को कमजोर किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपील खारिज की

सभी परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ को एकल न्यायाधीश के आदेश में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं मिला।

अदालत ने माना कि पेटेंट धारक इस चरण पर यह दिखाने में सफल नहीं हुए कि Xiaomi का Find Device फीचर पेटेंट की आवश्यक तकनीकी विशेषताओं का उल्लंघन करता है।

इसके अलावा, कार्यवाही शुरू करने में हुई लंबी देरी और पेटेंट की समाप्ति की नजदीकी तारीख भी अंतरिम राहत के खिलाफ महत्वपूर्ण परिस्थितियां थीं।

इस आधार पर अदालत ने अपील को खारिज कर दिया।

इस फैसले का क्या महत्व है?

यह फैसला पेटेंट विवादों में essential technical features की भूमिका को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

किसी दो तकनीकों का उद्देश्य एक जैसा होना अपने आप में पेटेंट उल्लंघन साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। यह देखना जरूरी होता है कि कथित रूप से उल्लंघन करने वाले उत्पाद या सिस्टम में पेटेंट के दावे में शामिल आवश्यक तकनीकी विशेषताएं वास्तव में मौजूद हैं या नहीं।

इस मामले में हाई कोर्ट ने Xiaomi के Find Device फीचर और पेटेंट में वर्णित तकनीक के बीच मौजूद तकनीकी अंतर को महत्वपूर्ण माना।

फैसला यह भी दर्शाता है कि पेटेंट धारक यदि लंबे समय तक कथित उल्लंघन के बावजूद कानूनी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो बाद में अंतरिम राहत मांगते समय यह देरी उनके खिलाफ जा सकती है।

मामले का संक्षिप्त विवरण

मामला: Conqueror Innovations Private Limited एवं अन्य बनाम Xiaomi Technology India Private Limited
अदालत: दिल्ली हाई कोर्ट
पीठ: न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा
विवाद: पेटेंट उल्लंघन और Intellectual Property Rights
पेटेंट: Communication Device Finder System
मुख्य मुद्दा: Xiaomi के Find Device फीचर पर अंतरिम रोक
फैसला: अंतरिम रोक की मांग वाली अपील खारिज

Leave a Comment