Amazon, Flipkart और Meesho जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी करने वालों के लिए नए नियम आने वाले हैं। Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 के तहत ऑनलाइन डिस्काउंट, Sponsored Products, Search Results, Dark Patterns, Consumer Complaints और प्रोडक्ट की जानकारी से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है।
नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए यह जानना जरूरी है कि नए नियमों के बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी के दौरान उन्हें कौन-कौन सी नई जानकारी मिलेगी और कंपनियों की जिम्मेदारियां क्या होंगी।
Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules 2026: ऑनलाइन शॉपिंग के लिए क्या बदलेगा?
भारत सरकार ने ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 में नए बदलाव किए हैं। इन बदलावों के जरिए ई-कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए कीमत, डिस्काउंट, स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट, शिकायत, डार्क पैटर्न और उपभोक्ता जानकारी से जुड़े नियमों को और स्पष्ट किया गया है।
Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 को सितंबर 2026 में अधिसूचित किया गया है। नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
ई-कॉमर्स नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उपभोक्ताओं के सामने कई तरह की समस्याएं भी आती हैं। उदाहरण के लिए, किसी प्रोडक्ट पर बड़ा डिस्काउंट दिखाया जाता है, लेकिन ग्राहक के लिए यह पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता कि वास्तविक कीमत कितनी कम हुई है।
इसी तरह, सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिखाई देने वाला प्रोडक्ट हमेशा सबसे प्रासंगिक हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार पेड प्रमोशन या विज्ञापन सामान्य प्रोडक्ट लिस्टिंग जैसे दिखाई दे सकते हैं।
नए नियमों में ऐसे क्षेत्रों में अधिक पारदर्शिता लाने की कोशिश की गई है।
डिस्काउंट दिखाने के तरीके में बदलाव
नए नियमों के तहत डिस्काउंट या कीमत में कमी का प्रचार करते समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्धारित पिछली कीमत (Prior Price) से जुड़ी जानकारी देनी होगी।
Prior Price का मतलब उस कीमत से है जिस पर संबंधित वस्तु या सेवा को डिस्काउंट की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान सबसे कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया था।
इसका उद्देश्य यह है कि ग्राहक केवल बड़े प्रतिशत वाले डिस्काउंट को देखकर खरीदारी न करे, बल्कि उसे कीमत में वास्तविक कमी को समझने के लिए आवश्यक जानकारी भी मिले।
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सर्च रिजल्ट को भ्रामक तरीके से प्रभावित नहीं किया जा सकेगा
ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर किसी प्रोडक्ट की सर्च रैंकिंग उसकी बिक्री को प्रभावित कर सकती है। नए नियमों में ऐसे तरीके से सर्च रिजल्ट में बदलाव करने पर रोक लगाई गई है जिससे उपभोक्ता को भ्रमित किया जा सकता है या उसके द्वारा की गई सर्च के परिणामों की प्रासंगिकता कम हो सकती है।
इससे उपभोक्ताओं को किसी वस्तु की तलाश करते समय अधिक पारदर्शी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
Sponsored Products की स्पष्ट जानकारी देनी होगी
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कुछ प्रोडक्ट पैसे देकर प्रमोट किए जाते हैं। ऐसे प्रोडक्ट को सामान्य सर्च रिजल्ट से अलग पहचानना उपभोक्ता के लिए जरूरी है।
नए नियमों के अनुसार sponsored listings या paid placements की जानकारी स्पष्ट और प्रमुख रूप से दिखाई जानी चाहिए।
इससे ग्राहक यह समझ सकेगा कि किसी प्रोडक्ट को उसकी प्रासंगिकता के कारण दिखाया जा रहा है या उसके लिए भुगतान किया गया है।
Dark Patterns पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कुछ डिजाइन या इंटरफेस तकनीकों का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है कि ग्राहक ऐसा निर्णय ले सकता है जिसे वह सामान्य परिस्थितियों में नहीं लेना चाहता।
इन्हें आम तौर पर Dark Patterns कहा जाता है।
नए ई-कॉमर्स नियमों में प्लेटफॉर्म को Dark Patterns से जुड़े मौजूदा नियमों का पालन करना होगा। इसके साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों को हर वर्ष अपना self-audit करना होगा और नियमों के अनुपालन से संबंधित प्रमाणपत्र को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
Dark Patterns से जुड़े उदाहरणों में निम्न प्रकार की प्रथाएं शामिल हैं:
- False Urgency
- Basket Sneaking
- Confirm Shaming
- Forced Action
- Subscription Trap
- Interface Interference
- Bait and Switch
- Drip Pricing
- Disguised Advertisement
- Nagging
- Trick Questions
- SaaS Billing
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ग्राहक को शिकायत की कॉपी मिलेगी
यदि कोई ग्राहक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के grievance mechanism के जरिए शिकायत दर्ज करता है, तो शिकायत दर्ज करने वाले उपभोक्ता को उसकी शिकायत की एक कॉपी उपलब्ध करानी होगी।
इससे ग्राहक के पास अपनी शिकायत का आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा और आगे की कार्रवाई की जरूरत पड़ने पर यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।
National Consumer Helpline से जुड़ना होगा
नए प्रावधानों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को National Consumer Helpline (NCH) की convergence प्रक्रिया में भाग लेना होगा।
इसका उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारी से संबंधित शिकायतों के निपटारे के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सरकारी उपभोक्ता शिकायत व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
प्रोडक्ट और सेलर की अधिक जानकारी
ऑनलाइन खरीदारी करते समय ग्राहक को वस्तु और विक्रेता से संबंधित अधिक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
इसमें आवश्यकता के अनुसार ऐसी जानकारी शामिल हो सकती है:
- Best Before या Use Before की जानकारी
- Return Policy
- Refund की शर्तें
- Warranty से जुड़ी जानकारी
- Delivery संबंधी जानकारी
- Payment संबंधी जानकारी
- Seller से जुड़ी आवश्यक जानकारी
इसका उद्देश्य खरीदारी पूरी करने से पहले ग्राहक को महत्वपूर्ण शर्तों की जानकारी उपलब्ध कराना है।
Imported Products के लिए जानकारी
यदि कोई प्रोडक्ट विदेश से आयात किया गया है, तो ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस पर उसके Importer और Country of Origin से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
इससे ग्राहक को यह समझने में मदद मिलेगी कि उत्पाद किस देश का है और भारत में उसे किस आयातक के माध्यम से लाया गया है।
अनावश्यक अतिरिक्त शुल्क पर नियंत्रण
नए नियमों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म द्वारा ऐसी सेवाओं के लिए एक साथ शुल्क लेने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं जो उस ऑनलाइन सेवा से सीधे संबंधित नहीं हैं।
हालांकि, निर्धारित परिस्थितियों में loyalty या membership programmes के लिए अपवाद हो सकते हैं।
इस प्रावधान का उद्देश्य ग्राहक को यह स्पष्ट करना है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उससे कौन-कौन से शुल्क और किस कारण से लिए जा रहे हैं।
उपभोक्ता की जानकारी के इस्तेमाल पर सहमति जरूरी
नए नियम उपभोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई या प्लेटफॉर्म पर उत्पन्न जानकारी के कुछ उपयोगों को भी कवर करते हैं।
निर्धारित परिस्थितियों में ई-कॉमर्स इकाई को उपभोक्ता की express and affirmative consent प्राप्त करनी होगी।
इसका मतलब है कि संबंधित जानकारी के उपयोग के लिए ग्राहक की स्पष्ट और सकारात्मक सहमति आवश्यक होगी।
नए नियम कब लागू होंगे?
Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 को सितंबर 2026 में अधिसूचित किया गया है। इनके नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने सिस्टम, वेबसाइट इंटरफेस, कीमतों की जानकारी, विज्ञापन प्रकटीकरण और शिकायत व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने के लिए समय मिलेगा।
उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?
नए बदलाव ऑनलाइन खरीदारी के कई हिस्सों को प्रभावित करते हैं। ग्राहकों को डिस्काउंट, sponsored products, sellers, imported goods, return और refund जैसी जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से मिलने की व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा search results, dark patterns, शिकायत प्रक्रिया और consumer information के इस्तेमाल से संबंधित ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ाई गई हैं।
मुख्य बदलाव एक नजर में
| विषय | नया प्रावधान |
|---|---|
| डिस्काउंट | निर्धारित prior price की जानकारी देनी होगी |
| Search Results | भ्रामक तरीके से सर्च रिजल्ट प्रभावित नहीं किए जा सकेंगे |
| Sponsored Products | Paid listings की स्पष्ट पहचान करनी होगी |
| Dark Patterns | वार्षिक self-audit और compliance certificate |
| Consumer Complaint | शिकायत की कॉपी उपभोक्ता को देनी होगी |
| National Consumer Helpline | NCH convergence प्रक्रिया में भागीदारी |
| Product Information | प्रोडक्ट और seller से संबंधित अधिक जानकारी |
| Imported Goods | Importer और country of origin की जानकारी |
| Additional Charges | कुछ असंबंधित bundled charges पर प्रतिबंध |
| Consumer Information | निर्धारित उपयोगों के लिए express और affirmative consent |
Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 ऑनलाइन खरीदारी के क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता जानकारी से जुड़े कई नए प्रावधान लेकर आए हैं।
डिस्काउंट की पिछली कीमत, sponsored listings, search results, dark patterns, शिकायतों, imported products और consumer information जैसे क्षेत्रों में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए अतिरिक्त अनुपालन आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं।
नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इसलिए ई-कॉमर्स कंपनियों को उससे पहले अपने प्लेटफॉर्म और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप तैयार करना होगा।