दिल्ली के सत्य निकेतन में PG के रूप में इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद भवन सुरक्षा और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी स्तर पर सख्ती का संकेत दिया है। अदालत ने केवल दिल्ली तक सीमित रहने के बजाय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में भवन उपनियमों और भूमि उपयोग से जुड़े उल्लंघनों पर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी और 12 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया कि क्या रिहायशी इमारतों को PG, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नियमों का पालन किए बिना इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को व्यापक नजरिए से देखा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और Amicus Curiae अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि सत्य निकेतन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही आगे बढ़ रही है और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।
हालांकि, उन्होंने अदालत के सामने यह बात रखी कि सुप्रीम कोर्ट के सामने चल रहा मामला केवल PG आवासों तक सीमित नहीं है। भवन नियमों और भूमि उपयोग से जुड़े ऐसे उल्लंघन जिम, कोचिंग सेंटर और BPO जैसी जगहों पर भी दिखाई दे सकते हैं।
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एक कमरे में बड़ी संख्या में लोगों के रहने पर चिंता
सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने ऐसे परिसरों में लोगों की अत्यधिक संख्या को लेकर चिंता जताई। अदालत के सामने यह मुद्दा आया कि कई जगहों पर सीमित जगह में बड़ी संख्या में लोग काम या निवास कर रहे हैं, जबकि इमारत की क्षमता और सुरक्षित आने-जाने के रास्तों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।
Amicus Curiae ने दिल्ली के सैदुलाजाब क्षेत्र में किए गए निरीक्षण का भी उल्लेख किया, जहां कुछ इमारतों में लगभग 500 लोगों के काम करने की जानकारी सामने आई।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही जारी रखने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे से संबंधित दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही को अपने पास स्थानांतरित करने का फैसला नहीं किया। अदालत ने माना कि हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी जारी रख सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से मामले की नियमित और कम अंतराल पर निगरानी करने का अनुरोध किया है। इसका मतलब है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर चल रही जांच और कार्रवाई आगे भी हाई कोर्ट की निगरानी में जारी रहेगी।
रिहायशी इलाकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि शुरुआती स्तर पर उसका ध्यान ऐसे मामलों पर रहेगा जहां रिहायशी जमीन या भवन का इस्तेमाल निर्धारित भूमि उपयोग नियमों के विपरीत दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों से भवन उपनियमों और भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी देने वाले हलफनामे दाखिल करने को कहा है।
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राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में होगा सर्वे
सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी क्षेत्रों के गैर-आवासीय इस्तेमाल की पहचान करने के लिए व्यापक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
बाद में 5 अगस्त के आदेश में अदालत ने दिल्ली और NDMC क्षेत्र में आवश्यक भौतिक सर्वे पूरा नहीं होने का उल्लेख किया था। इसके लिए सक्षम ड्राफ्ट्समैन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने लखनऊ में भी इसी तरह के सर्वे और रिपोर्ट की मांग की थी।
अब सुप्रीम कोर्ट ने केवल दिल्ली और लखनऊ तक सीमित न रहकर संबंधित सभी अधिकारियों से पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है।
दिल्ली और लखनऊ में निरीक्षण की जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिल्ली और लखनऊ के कुछ हिस्सों में निरीक्षण किया जा चुका है।
दिल्ली में लाजपत नगर, मालवीय नगर और सरोजिनी नगर में सर्वे किया गया, जबकि लखनऊ में अलीगंज क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। अदालत ने अन्य संबंधित प्राधिकरणों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में की गई कार्रवाई और निरीक्षण की जानकारी देने का निर्देश दिया।
PG और निजी हॉस्टल भी जांच के दायरे में
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG हॉस्टलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।
इस निरीक्षण में यह जांच की जानी है कि संबंधित इमारतों के पास जरूरी अनुमति है या नहीं, भवन उपनियमों का पालन किया गया है या नहीं और PG हॉस्टलों को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक या प्रशासनिक व्यवस्था लागू है या नहीं।
Amicus Curiae ने सुप्रीम कोर्ट के सामने भी PG, निजी हॉस्टल और इसी तरह के छात्र आवासों की सुरक्षा जांच को समयबद्ध तरीके से कराने की मांग रखी है।
पहले भी असुरक्षित इमारतों की पहचान हुई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले गठित समिति ने दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और मालवीय नगर में इमारतों का निरीक्षण किया था। यह निरीक्षण 3 सितंबर को पूरा हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, सैदुलाजाब, साकेत और लाजपत नगर में कुछ इमारतों को चिंताजनक और असुरक्षित स्थिति में पाया गया। इसके बाद PG और इसी प्रकार के अन्य प्रतिष्ठानों को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने की मांग उठी।
मामला केवल सत्य निकेतन तक सीमित नहीं
सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा कार्यवाही का दायरा भवन उपनियमों के उल्लंघन और भूमि उपयोग नियमों की अनदेखी से जुड़ा व्यापक मामला है। अदालत ने मार्च 2026 में इस मुद्दे की निगरानी देशव्यापी स्तर पर करने की दिशा में कदम उठाया था।
सत्य निकेतन हादसे ने इस व्यापक मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है। अदालत अब यह देखना चाहती है कि अलग-अलग शहरों में रिहायशी इमारतों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और क्या संबंधित स्थानीय निकाय नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं।
आगे 15 सितंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे सूचीबद्ध किया है। उस समय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित अधिकारियों की ओर से दाखिल रिपोर्टों पर आगे विचार किया जा सकता है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई यह न्यायिक प्रक्रिया भविष्य में PG, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर, जिम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भवन सुरक्षा और भूमि उपयोग नियमों के पालन को लेकर व्यापक असर डाल सकती है।
मामला: Loganathan v. The State of Tamil Nadu
Case No.: Miscellaneous Application Diary No. 17103/2026