तेलंगाना हाईकोर्ट ने पतंजलि फूड्स लिमिटेड को बड़ा झटका देते हुए सूर्यापेट जिले में कंपनी को आवंटित ऑयल पाम फैक्ट्री जोन को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने माना कि कंपनी तय समयसीमा में ऑयल पाम प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की अपनी संविदात्मक जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकी।
तेलंगाना हाईकोर्ट का पतंजलि फूड्स को झटका, सूर्यापेट ऑयल पाम फैक्ट्री जोन रद्द करने का फैसला बरकरार
मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने पतंजलि फूड्स की रिट अपील खारिज कर दी। कंपनी ने एकल न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें सूर्यापेट फैक्ट्री जोन का आवंटन रद्द करने के सरकार के निर्णय को बरकरार रखा गया था।
क्या था पूरा विवाद?
पतंजलि फूड्स, जो पहले मैक ऑयल पाम लिमिटेड के नाम से काम करती थी, वर्ष 2009 से तेलंगाना में ऑयल पाम की खेती से जुड़ी हुई है। कंपनी को अलग-अलग समय पर नलगोंडा और सूर्यापेट जिलों में फैक्ट्री जोन आवंटित किए गए थे।
15 मार्च 2017 को कंपनी और राज्य सरकार के बीच एक Memorandum of Agreement (MoA) हुआ था। इस समझौते के तहत कंपनी को निर्धारित अवधि के भीतर ऑयल पाम प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी थी। समझौते में 24 महीने के भीतर प्रोसेसिंग यूनिट तैयार करने और उससे संबंधित आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी कंपनी पर डाली गई थी।
हालांकि, तय समय बीत जाने के बाद भी कंपनी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित नहीं कर सकी। सरकार की ओर से कंपनी को कई बार नोटिस दिए गए और अपना पक्ष रखने के अवसर भी दिए गए। इसके बावजूद निर्धारित शर्त पूरी नहीं होने पर राज्य सरकार ने कार्रवाई की।
सूर्यापेट का आवंटन क्यों रद्द हुआ?
सरकार के अनुसार केवल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने में देरी ही समस्या नहीं थी। सूर्यापेट क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में भी कंपनी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा।
उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, सूर्यापेट में प्रस्तावित क्षेत्र की तुलना में वास्तविक पौधरोपण काफी कम रहा। रिपोर्टों में बताया गया है कि निर्धारित क्षेत्र का लगभग 14 प्रतिशत ही कवर हो पाया था।
कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए कई शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। दिसंबर 2024 में व्यक्तिगत सुनवाई भी हुई। इसके बावजूद सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी अपनी प्रमुख जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रही है।
इसके बाद 15 मार्च 2025 को जारी सरकारी आदेश के जरिए सूर्यापेट फैक्ट्री जोन का आवंटन रद्द कर दिया गया। उसी दिन एक अन्य आदेश के माध्यम से यह जोन दूसरी कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
पतंजलि फूड्स ने कोर्ट में क्या कहा?
कंपनी ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि समझौते की शर्तों को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि प्रोसेसिंग यूनिट में देरी होने पर फैक्ट्री जोन का आवंटन सीधे रद्द कर दिया जाए।
कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि उसने तेलंगाना में काफी निवेश किया है और किसानों से ऑयल पाम की उपज खरीदने जैसी अपनी अन्य जिम्मेदारियां निभाई हैं। कंपनी ने यह दावा भी किया कि आवंटन रद्द करना अत्यधिक और अनुपातहीन कार्रवाई है। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने अपने संचालन में करीब ₹49.53 करोड़ के निवेश का भी उल्लेख किया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
खंडपीठ ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी पक्ष ने समझौते के तहत स्पष्ट जिम्मेदारी स्वीकार की हो और उसे पूरा करने के लिए पर्याप्त समय तथा अतिरिक्त अवसर भी दिए गए हों, तो वह आवंटन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की अपेक्षा नहीं कर सकता।
कोर्ट के अनुसार, पतंजलि फूड्स निर्धारित समय में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने में विफल रही और बार-बार अवसर मिलने के बाद भी स्थिति में आवश्यक सुधार नहीं हुआ। इसलिए राज्य सरकार का निर्णय मनमाना या अनुपातहीन नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि सरकार ने अचानक कार्रवाई नहीं की थी। कंपनी को नोटिस दिए गए, उसकी सफाई पर विचार किया गया और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया गया। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आधार भी पर्याप्त नहीं पाया गया।
कोर्ट के फैसले का कानूनी महत्व
इस फैसले में हाईकोर्ट ने संविदात्मक दायित्वों के पालन को महत्वपूर्ण माना है। सरकारी जमीन, जोन या किसी अन्य सुविधा का आवंटन यदि निर्धारित शर्तों के साथ किया गया है, तो लाभार्थी से उन शर्तों को समय पर पूरा करने की अपेक्षा की जाती है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बाद में उठाए गए कदम पहले से हुई संविदात्मक चूक को स्वतः समाप्त नहीं कर देते। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, फैक्ट्री के लिए जमीन खरीदने की कार्रवाई भी आवंटन रद्द होने के बाद हुई थी, इसलिए इससे पहले की चूक को सही नहीं ठहराया जा सकता था।
निष्कर्ष
तेलंगाना हाईकोर्ट का यह फैसला पतंजलि फूड्स की सूर्यापेट ऑयल पाम फैक्ट्री जोन से जुड़ी अपील के खिलाफ गया है। अदालत ने माना कि कंपनी निर्धारित अवधि में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और संबंधित प्रदर्शन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही थी। सरकार की ओर से नोटिस और सुनवाई के पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद लिया गया रद्दीकरण का फैसला अदालत को मनमाना नहीं लगा।
इस प्रकार, हाईकोर्ट ने एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखते हुए पतंजलि फूड्स की रिट अपील खारिज कर दी।