कोर्ट की रिकॉर्डिंग YouTube पर डालने का आरोप, केरल हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ शुरू की अवमानना कार्यवाही

केरल हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की कथित रूप से बिना अनुमति रिकॉर्डिंग कर उसे YouTube जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए फिलहाल उनकी वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेशी पर रोक लगा दी है।

मामले ने न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसके सोशल मीडिया पर प्रसारण को लेकर लागू नियमों पर फिर से ध्यान खींचा है।

केरल HC में वकील के खिलाफ अवमानना कार्यवाही, YouTube पर कोर्ट रिकॉर्डिंग का आरोप

केरल हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की कथित तौर पर बिना अनुमति रिकॉर्डिंग कर उसे YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के मामले में अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुमपारा के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। अदालत ने अंतरिम आदेश के तौर पर उन्हें केरल की किसी भी अदालत की कार्यवाही में ऑनलाइन या वर्चुअल माध्यम से शामिल होने से भी अगले आदेश तक रोक दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला केरल हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से दी गई एक रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित अधिवक्ता ने अदालत की कार्यवाही के वीडियो कथित रूप से रिकॉर्ड करके अपने YouTube चैनल पर अपलोड किए थे।

हाईकोर्ट के अनुसार, यह गतिविधि पहले दी गई चेतावनियों के बावजूद जारी रही। अदालत ने कहा कि संबंधित वकील को इस बात की जानकारी थी कि बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही को रिकॉर्ड करना या सार्वजनिक करना नियमों के विपरीत है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति स्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने की।

Also Read: क्या भारत में बहुविवाह पर लगेगा बैन? सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती

कोर्ट की अनुमति के बिना रिकॉर्डिंग पर रोक

हाईकोर्ट ने केरल इलेक्ट्रॉनिक ऑडियो-वीडियो लिंकेज रूल्स, 2025 के नियम 3(9) का उल्लेख किया। इस नियम के तहत अदालत की कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है।

नियम के अनुसार, अदालत की लिखित अनुमति के बिना कार्यवाही को प्रसारित करना, रिकॉर्ड करना, प्रकाशित करना, साझा करना या उसका किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। यह रोक कार्यवाही के पूरे हिस्से या उसके किसी भाग, दोनों पर लागू होती है।

YouTube वीडियो के शीर्षकों पर भी कोर्ट की आपत्ति

मामले में जिन वीडियो को लेकर आपत्ति जताई गई, उनके शीर्षक भी अदालत के सामने महत्वपूर्ण रहे। इनमें अदालत की कार्यवाही को लेकर ऐसे दावे और टिप्पणियां शामिल थीं, जिनसे दर्शकों को न्यायिक प्रक्रिया पर अपनी राय बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इन वीडियो के शीर्षक और बिना अनुमति कार्यवाही को रिकॉर्ड करके सार्वजनिक करने का तरीका आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है। अदालत ने इसे Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 2(c)(i) के संदर्भ में देखा।

वकील की वर्चुअल पेशी पर रोक

अदालत ने मामले में तत्काल एक महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश भी दिया। संबंधित अधिवक्ता को अगले आदेश तक केरल में किसी भी कोर्ट की कार्यवाही में ऑनलाइन या वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश को राज्य के हाईकोर्ट और जिला अदालतों के न्यायाधीशों तथा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। साथ ही, कंप्यूटरीकरण से जुड़े रजिस्ट्रार-कम-आईटी निदेशक को आदेश के अनुपालन के लिए सूचित करने को कहा गया।

Also Read: CBSE की तीन-भाषा नीति पर पुनर्विचार को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का भी संदर्भ

हाईकोर्ट ने इस मामले पर विचार करते समय सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश का भी संज्ञान लिया। उस आदेश में न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, साझा, प्रसारित या अन्य तरीके से उपलब्ध कराने पर अंतरिम रोक से जुड़ी दिशा-निर्देशों पर जोर दिया गया था।

इस संदर्भ में केरल हाईकोर्ट ने माना कि अदालत की कार्यवाही को बिना अनुमति डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डालना केवल सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि नहीं माना जा सकता, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और अदालत के निर्धारित नियमों का सवाल जुड़ता है।

अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने इस चरण पर मामले का अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित अधिवक्ता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।

अदालत ने फिलहाल वकील की वर्चुअल उपस्थिति पर रोक लगाई है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्ष का जवाब और मामले से जुड़े अन्य पहलू सामने आने के बाद अदालत आगे का आदेश दे सकती है।

कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने को लेकर क्या संदेश गया?

इस मामले से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अदालतों में चलने वाली कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसके डिजिटल प्रसारण को लेकर न्यायपालिका बेहद गंभीर है। सोशल मीडिया या YouTube पर किसी कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो उपलब्ध होना अपने आप में उसे सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता।

विशेष रूप से वकीलों और अदालत की कार्यवाही से जुड़े लोगों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्यायिक कार्यवाही से संबंधित डिजिटल सामग्री को प्रकाशित या साझा करने से पहले लागू नियमों और अदालत की अनुमति का पालन करना आवश्यक है।

मामले का सार: केरल हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुमपारा के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। आरोप है कि उन्होंने अदालत की कार्यवाही को बिना अनुमति रिकॉर्ड कर YouTube और X पर प्रकाशित किया। हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक उनकी वर्चुअल कोर्ट उपस्थिति पर रोक लगा दी है और मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी।

Leave a Comment