भारत में सरकारी व्यवस्था के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य द्वारा AI तकनीक के उपयोग से जुड़े नैतिक और पारदर्शी नियमों की जरूरत पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया है।
13 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह उन प्रस्तावों पर विचार करे जिनमें सरकारी एजेंसियों द्वारा AI के इस्तेमाल के लिए बाध्यकारी नैतिक मानक, पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था तैयार करने की मांग की गई है।
किस मामले में आया सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा था, जिसमें सरकारी स्तर पर AI तकनीक के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की गई थी।
याचिका में खास तौर पर राज्य की निगरानी व्यवस्था, पुलिसिंग और कंटेंट मॉडरेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही और सुरक्षा मानकों की आवश्यकता बताई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। इसके बजाय संबंधित अधिकारियों को याचिका को सरकार के सामने एक औपचारिक अभ्यावेदन के रूप में लेने और उचित नीतिगत कदमों पर विचार करने का निर्देश दिया।
AI के सरकारी इस्तेमाल पर क्यों जरूरी है निगरानी?
AI तकनीक का इस्तेमाल प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों को तेज और प्रभावी बना सकता है। लेकिन जब ऐसी तकनीक का प्रयोग नागरिकों की निगरानी, पुलिस कार्रवाई या ऑनलाइन सामग्री से जुड़े फैसलों में किया जाता है, तो इसके गलत इस्तेमाल की संभावना भी रहती है।
ऐसे मामलों में यह जरूरी हो सकता है कि लोगों को यह पता हो कि किसी निर्णय में AI की क्या भूमिका रही है और उस निर्णय के लिए अंतिम जिम्मेदारी किस अधिकारी या संस्था की होगी।
इसी वजह से AI आधारित सरकारी प्रणालियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
Also Read: UPI Payment पर लगेगा चार्ज? संसद से पास हुआ नया टैक्स बिल, जानिए क्या बदला
सरकार के सामने क्या प्रस्ताव रखे गए?
याचिका में सरकारी AI प्रणालियों के लिए कुछ व्यापक सुरक्षा और नैतिक मानकों पर विचार करने की मांग की गई थी। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- AI के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नैतिक मानक।
- सरकारी AI प्रणालियों में पारदर्शिता।
- AI से जुड़े फैसलों की निगरानी और जवाबदेही।
- संवेदनशील सरकारी कार्यों में उचित मानवीय नियंत्रण।
- निगरानी और पुलिसिंग में AI के इस्तेमाल के लिए सुरक्षा उपाय।
- कंटेंट मॉडरेशन जैसी गतिविधियों में स्पष्ट नियम।
सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रस्तावों को सीधे लागू करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर विचार करने को कहा है।
याचिका का निपटारा, लेकिन रास्ता खुला
अदालत ने जनहित याचिका को उसके गुण-दोष पर फैसला दिए बिना समाप्त किया। हालांकि याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह सरकार के सामने अतिरिक्त सामग्री और संबंधित सुझाव भी प्रस्तुत कर सकता है।
इसका मतलब है कि AI के सरकारी इस्तेमाल को लेकर नीति बनाने की प्रक्रिया में आगे भी सुझाव और दस्तावेज सरकार के समक्ष रखे जा सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार के स्तर पर यह विचार किया जा सकता है कि सरकारी AI प्रणालियों के लिए अलग नैतिक और संचालन संबंधी मानक आवश्यक हैं या नहीं।
खासकर पुलिसिंग, निगरानी और डिजिटल कंटेंट से जुड़े मामलों में AI का इस्तेमाल सीधे नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए भविष्य में ऐसी तकनीक के लिए स्पष्ट नियम, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और मानव निगरानी महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई बाध्यकारी AI नीति लागू नहीं की है, लेकिन उसने सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर जरूर खींचा है। सरकारी कामकाज में AI का विस्तार होने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि तकनीक का इस्तेमाल कितना पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए।
अदालत का यह कदम AI आधारित सरकारी प्रणालियों के लिए भविष्य में अधिक स्पष्ट नैतिक और नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।